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अब इन शिक्षकों की नौकरी जानी तय, शिक्षा विभाग ने लिया निर्णय!

Patna - बिहार में 32000 से अधिक नियोजित शिक्षकों पर नौकरी का संकट मंडरा रहा है। शिक्षा विभाग को शक है कि इन शिक्षकों ने नौकरी पाने के लिए नकली प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया है। विभाग ने इसकी जांच के लिए निगरानी विभाग से शिकायत की है। मामला और भी गंभीर इसलिए है क्योंकि कई शिक्षकों ने दूसरे राज्यों से मिले प्रमाण पत्रों के आधार पर बिहार में नौकरी हासिल की है। बताया जा रहा है कि जिन शिक्षकों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उनका वेतन भी वसूला जाएगा।



शिक्षा विभाग ने अब इन सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच शुरू कर दी है। विभाग ने निगरानी विभाग को उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और गुजरात के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर सम्बंधित प्रमाण पत्रों की पुष्टि करने का आदेश दिया है।

सबसे बड़ी चुनौती पुराने रिकॉर्ड्स की जॉच कराना 

 शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती 18 से 30 साल पुराने प्रमाण पत्रों की जांच करना है। कई रिकॉर्ड मैन्युअल रूप से रखे गए हैं और कई विश्वविद्यालयों में ये रिकॉर्ड क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिसके कारण जांच में और देरी होने की आशंका है।

CTET वाले भी है रडार पर

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इसके अलावा 1400 शिक्षकों के CTET परीक्षा में 60 फीसदी से कम अंक पाने का मामला भी सामने आया है। नियमों के अनुसार, बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को CTET में 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। विभाग के अनुसार, प्रदेश में काम करने वाले अब तक 1.87 लाख शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच की जा चुकी है। अभी भी 37 हजार शिक्षकों ने अपने प्रमाण पत्रों का सत्यापन नहीं कराया है, जिससे संदेह और भी गहरा गया है। विभाग का कहना है कि इस मामले में सभी की जांच की होगी।


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